सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

पशुओं के प्रति व्यवहार ही असली कर्म है

पशुओं से प्यार क्यों जरूरी है? जानवरों को सताने के परिणाम? बच्चों को पशु प्रेम कैसे सिखाएँ? कर्म और जीवन का सत्य why kindness to animals matters?
हाल की पोस्ट

क्या भारत में सरकारी प्राथमिक शिक्षक सबसे ज़्यादा इस्तेमाल और सबसे कम सम्मानित संसाधन बन चुके हैं?

क्या भारत में सरकारी प्राथमिक शिक्षकों का सबसे अधिक दुरुपयोग होता है? सरकारी योजनाओं का बोझ प्राथमिक शिक्षकों पर क्यों डाला जाता है? ULLAS और अन्य योजनाओं के टारगेट से प्राथमिक शिक्षक क्यों परेशान हैं? क्या गैर-शैक्षणिक कार्यों से सरकारी स्कूलों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है? प्राथमिक शिक्षक को सबसे कम आंका जाने वाला सरकारी संसाधन क्यों माना जाता है?

जीवन के उतार-चढ़ाव को स्वीकार करने की कला

ज़िंदगी एक यात्रा क्यों है सरल शब्दों में? लोग हमारी ज़िंदगी में क्यों आते और चले जाते हैं? रिश्तों में बिछड़ने को कैसे स्वीकार करें? जीवन में बदलाव को सकारात्मक तरीके से कैसे अपनाएँ? मिलना और बिछड़ना जीवन का हिस्सा क्यों है?

पिंजरे में बंद पंख: क्या हमें सच में पक्षियों से प्रेम है?

  क्या पक्षियों को पिंजरे में रखना सही है? पक्षियों की स्वतंत्रता पर भावनात्मक लेख जानवरों के प्रति संवेदनशीलता कैसे बढ़ाएँ? पालतू पक्षी रखना सही या गलत? आज सुबह जब मैं अपनी बालकनी में खड़ा था और हल्की धूप सामने की इमारतों की दीवारों पर उतर रही थी, तब मेरी नजर सामने वाले फ्लैट की खिड़की पर पड़ी जहाँ एक छोटा-सा पिंजरा टंगा हुआ था और उस पिंजरे के भीतर दो हरे रंग के तोते बार-बार एक छोर से दूसरे छोर तक फुदक रहे थे, जैसे कोई अदृश्य दीवार उन्हें हर बार रोक देती हो और वे समझ ही नहीं पा रहे हों कि उनके पंख आखिर किसलिए बने हैं। उसी समय आकाश में कई चिड़ियाँ बेफिक्र होकर गोल-गोल चक्कर लगा रही थीं, हवा को चीरती हुई ऊपर उठतीं और फिर नीचे आतीं, मानो आसमान उनका घर हो और धरती उनका विश्राम-स्थल, लेकिन इन दो तोतों के हिस्से में केवल लोहे की सलाखें थीं, एक छोटा-सा डंडा था जिस पर वे बैठते थे, और एक कटोरी में रखा दाना था जो उनके जीवन की पूरी सीमा बन गया था। मैंने कुछ देर तक उन्हें देखना बंद नहीं किया, क्योंकि उनकी आँखों में एक बेचैनी थी जिसे शब्दों में बयान करना आसान नहीं है, वे बाहर उड़ती चिड़ियों को...

क्या हम सुविधा के लिए नियम तोड़ते-तोड़ते समाज तो नहीं तोड़ रहे?

नियमों से नफरत क्यों होती है ट्रैफिक नियमों का पालन क्यों जरूरी है समाज को मजबूत कैसे बनाएं अनुशासन पर लेख हिंदी में मानवता और नियम में अंतर

मैं तब खुश हो जाऊँगा… – एक अधूरी दौड़ की कहानी

Q1. “मैं तब खुश होऊँगा” मानसिकता क्या है? Q2. क्या पैसा और प्रमोशन स्थायी खुशी दे सकते हैं? Q3. भारतीय मध्यमवर्ग में सफलता का दबाव क्यों अधिक होता है? Q4. क्या परिवार के लिए कमाना ही पर्याप्त है? Q5. आत्म-स्वीकार क्यों महत्वपूर्ण है? Q6. वर्तमान में जीना क्यों जरूरी है? Q7. क्या रिटायरमेंट के बाद ही जीवन का अर्थ समझ आता है? Q8. लगातार तुलना करने से क्या प्रभाव पड़ता है? Q9. असली सफलता की परिभाषा क्या होनी चाहिए? Q10. क्या आज से ही संतोष का अभ्यास शुरू किया जा सकता है?
WhatsApp